पौधे का बैज्ञानिक नाम - हमारे किचन में पाये जाने वाले लहसुन का बैज्ञानिक नाम Alium Sativa Linnious है इसकी दवा फेफड़े की गैंग्रीन और कुकुर खासी में और फेफड़ो के तपेदिक रोग में बहुत ही लाभदायक होता है।
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विभिन्न भाषाओ में प्रचलित नाम - हिंदी में लहसुन,गुजराती में लसन,बंगाली और मराठी में लसुन,तमिल में बेलोईपुन्डू, तेलगु और मलयालम में टेल्लागड्डा और बेलचुली और कन्नड़ में बेल्लली आदि नामो से जाना जाता है।
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वंश - यह लिलिएसी (Liliaceae) वंश की खाद्य और औषधीय बूटी है।
निवास - यह बूटी मध्य एशिया का मूल निवासी है भूमध्य स्थित देशो में इसकी खेती की जाती है भारत इसका विदेशों में निर्यात भी करता है।
पौधा का वर्णन - यह एक मसालेदार एक वर्षीय पौधा है इसकी पत्तिया सकरी और चपटी होती है मुख्य डंठल पर छोटे व् सफ़ेद फूल और पत्र कलिकाये होती है साधरणतया इसके फूल दिखाई नहीं देते है इसके कांड या गाँठ में अनेक छोटे छोटे सफ़ेद कन्द होते है जिन्हे जव कहा जाता है प्रत्येक जव एक पतली सफ़ेद या गुलाबी झिल्ली से सम्पुटिका की तरह आवेष्ठित रहता है। लहसुन का स्वाद तथा गंध अपनी ही जाती के अन्य सम्बन्धियों से तीव्र होता है खेती के लिए इसके जव गाँठ से अलग कर के बोये जाते है।
औषधीय कार्य हेतु बूटी का उपयोगी भाग - इस बूटी के कन्द या गाँठ का पृथक रूप जब औषधीय कार्य के लिए व्यवहार किये जाते है इसका संग्रहण जुलाई और अगस्त माह में किया जाता है। जबकि इसकी फसल की कटाई मार्च के अंत में और अप्रैल के आरम्भ में हो जाती है।
पौधा से प्राप्त रासायनिक यौगिक - लहसुन के एक सामान्य गाँठ में Moisture 62.8%, Protin 6.3%, Fait 0.1%,Carbohydrets 29.0%, Calcium 0.03%, Phosporas 0.31%, Iron 1.3 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम में,विटामिन C 13 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम में पाया जाता है। इसमें Copper की भी उपस्थिति बतायी जाती है। इसके आलावा इसमें Garlic, Allitn, Allicin, Inulin, Essence, Vitamin A & B,तथा एंजाइम पाए जाते है।
रासायनिक पदार्थोबके गुड़, धर्म और शारीरिक क्रियाये - इस बूटी से प्राप्त रासायनिक पदार्थ Antibiotic, Antiviral, Antiseptic, (Hypoglycaemiant) रक्त में सर्करा की अतिरिक्त मात्रा को काम करना , (Hypotensive) उच्च रक्त चाप कम करना , (Antirheumatic) जोड़ो के दर्दो को दूर करने वाला , (Corn remover) घट्ठों को दूर करने वाला , (Despepsia) मन्दाग्नि , (Colic) उदर शूल में उपयोगी पाया जाता है।
बूटी के व्यवहार का प्रचलित स्वरुप - औषधीय कार्यो के लिए इस बूटी का टिंक्चर, तरल, ताजा रस, ऑइंटमेंट,और पुल्टिस के रूप में प्रयोग किया जाता है।
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