पौधे का बैज्ञानिक नाम - इस पौधा का वैज्ञानिक या औषधीय नाम - Chelidonium Majus Linnious है।
वंश - यह Papaveraceae कुल की वनस्पति है यह अपनी वंश की अकेली जाती की वनस्पति है।
![]() |
Pic credit - Google/https://lt.wikipedia.org |
विभिन्न भाषाओ में इस वनस्पति का प्रचलित नाम - आंग्ल भाषा में इसका सामान्य नाम Celandine or Greater Celandine, और विभिन्न ग्रंथो में उपलब्ध वर्णन के अनुसार इस वनस्पति का जातीय नाम या तो लैटिन भाषा Donumeoeli शब्द से लिया गया है। जिसका शाब्दिक अर्थ स्वर्ग का उपहार होता है या फिर ग्रीक भाषा में Kholidon शब्द से लिया गया है। जिसका शाब्दिक अर्थ आवलीक नामक चिड़िया होती है। अन्य भाषा में इस वनस्पति का नाम अनुपलब्ध है।
![]() |
Pic credit - Google/https://commons.wikimedia.org |
वंश - यह Papaveraceae कुल की वनस्पति है यह अपनी वंश की अकेली जाती की वनस्पति है।
![]() |
Pic credit - Google/https://commons.wikimedia.org |
निवास - यह वनस्पति एशिया और यूरोप का मूल निवासी है। यह सम्पूर्ण यूरोप,पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में आमतौर पर पाया जाता है। ब्रिटेन का यह मूल निवासी है। यह वनस्पति मुख्यतः ईट, पत्थर के टुकड़ो या घर की पुरानी बाहरी दीवारों पर नमी वाले स्थानों में प्रायः उगती हुई पायी जाती है।
वनस्पति विन्यास का वर्णन - यह एक वर्षीय शाकीय और धनुषाकार वनस्पति है इसकी जड़े, मुसला जड़ (Taproots), होती है और शाखाएं चौतरफा (In all direction) फैलती है। इसकी लम्बी शाखाएं भीतर की ओर धन्वाकार मुड़ी हुई होती है। इसकी पत्तिया पंत वृन्तो (Peteolate) पर परदार छोटी छोटी होती है। पत्तियों के वृत्त खंड या तो वृन्त विहीन (Sessile) होती है। या वृन्त अति लघु होते है। वृत्त खंड से बाहर पुनः पत्र वृन्त आगे होते है और उन वृन्तो में भी पत्तिया होती है। जिनका हासिया (Margine) दंतुर (Serrate) या किनारो से कटी हुई होती है। इसके छोटे छोटे फूलो का रंग सुनहरा पीला होता है। इन फूलो में चार अदद छोटे छोटे पुष्प दल या पंखुडिया होती है। इसके बाह्य दलपुंज (Calyx) में दो अदद परिदल या अंखुड़िया होती है। इसके पुष्पदल पुंज (Corolla) में पंखुडिया (Petall) छाते की शक्ल में गुच्छेदार समूह में लगे होते है इसकी लम्भी फलिया या डोढिया तीन से चार की संख्या में एक साथ लगती है। जो मुख्य तना या शाखा तना से एक फल वृन्त से जुड़े होते है फलियों की ऊपरी सतह रवेदार होती है परिपक्वा फलियों का रंग उजला हो जाता है।
औषधीय कार्य हेतु पौधे का उपयोगित भाग - औषधीय कार्यो के लिए इस वनस्पति के सम्पूर्ण अंग (जड़, तना, शाखाएं, पत्तिया, फूल, और फल) सब व्यवहार किया जाता है। औषधीय के लिए ताज़ी वनस्पति व्यवहार करने की अनुसंशा की गयी है।
वनस्पति से प्राप्त रासायनिक यौगिक - इस वनस्पति से प्राप्त टिंक्चर में Chelidonine, Sanguinarine, Chelerythrine, Protopine,Barberine, Spartine, नामक कई एल्केलायड और एंजाइम पाए जाते है इसके आलावा यौगिक रूप में फॉस्फेट, कैल्शियम, अमोनियम, मैग्नीशियम, आदि कई पदार्थ पाए जाते है।
रासायनिक पदार्थो के गुण, धर्म और शारीरिक क्रियाये - स्थानीय लोग इस वनस्पति का चर्म रोगो और छहीया (Skin Disease & Frackle), (Frackle - A brown spot on the skin commonly found on the arms and face of young people with a fair complexion.) की चिकित्सा के लिए व्यवहार करते है।
इस पौधे के सुख जाने पर इसका व्यवहार श्वास कष्ट आरोग्यता , कफ निःसारक (Expectorant), और निद्राल (Hypnotic) की तरह किया जाता है। इसका व्यवहार हर प्रकार के ज्वर की चिकित्सा के लिए किया जाता है। इसके रसायन के प्रभाव से पित्त का स्राव और प्रवाह (Secretion and flow of Bile increased) बढ़ जाता है। इसकी क्रिया यकृत और पित्त प्रणाली पर (Choleretic & Cholagogic) hoti hai .
इसके रसायन पित्त को ब्लड में सीधे (Direct)या प्रत्यक्ष प्रवेश करने से रोकते है। ऐसे गुन रखने वाले रसायन पीलिया (Jaundice) की बहुत बढ़िया दवा होती है। रामबाण कह सकते है।
इस पौधे में यकृत, फेफड़ो और गुर्दे की सभी बीमारियों को आरोग्य करने की अच्छी औषधीय प्रमाणित हुए है।
वनस्पति के व्यवहार का प्रचलित स्वरुप - औषधीय कार्य के लिए इस वनस्पति का इन्फ्यूजन (Infusion ), टिंक्चर (Tincture) और स्वरस (Jnice) के रूप में व्यवहार प्रचलित है।
इसकी स्थूल मात्रा का प्रयोग कभी भी नहीं करनी करनी चाहिए।
Good plants
जवाब देंहटाएं